ग्रीष्मोत्सव में नंदा राजजात देखकर भावविभोर हुए लोग
पौड़ी। ग्रीष्मोत्सव की दूसरी सांस्कृतिक संध्या मे स्थानीय शिक्षण संस्थानों के सीनियर वर्ग के छात्र छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक संध्या में किनाश बैंड के कलाकारों ने पुराने हिंदी गीतों की प्रस्तुति देकर संध्या को यादगार बना दिया। जिसमे शिवमूर्ति राणा की ओ मेरी रानी जरा सामने आ, खोया खोया चांद, तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है, जिंदगी कैसी है पहेली आदि की बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। बैंड के कलाकार अजय रतूड़ी ने स्व. मथुरा प्रसाद डोभाल द्वारा लिखित जाग जाग हे धरती माता जाग कलिका अवतारा से कार्यक्रम की शुरुआत की। सीनियर वर्ग में आयोजित प्रतियोगितात्मक प्रतिस्पर्धा में छात्र छात्राओं ने उत्तराखण्ड राज्य के साथ ही विभिन्न प्रांतों के मनमोहक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। सीनियर वर्ग में बीआर मॉडर्न स्कूल ने नंदा राजजात यात्रा नंदा भवानी और आसामी लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। राआइंका पौड़ी ने द्रोपदी स्वयंवर, राजमति देवी सरस्वती शिशु मंदिर तिमली ने भलु लगदू मेरु मुलुक, डीएवी इंटर कॉलेज ने खेला झुमलो , राकइंका पौड़ी ने कन्नड़ी लोक नृत्य, मेसमोर इंटर कॉलेज ने रुपसा रमोती और हिल्स इंटरनेशनल ने जौनसारी की प्रस्तुति देकर छात्र छात्राओं ने उत्तराखण्ड के विभिन्न हिस्सों के लोक संस्कृति के रंग बिखरे। इन प्रस्तुतियों ने खचाखच भरे रामलीला मैदान में देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा। सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोतवाल गोविंद कुमार ने कहा कि आयोजन में छात्र छात्राओं का प्रतिभाग करना उनकी प्रतिभा को बढ़ावा देता है इसलिए अध्यन के साथ साथ संस्कृतिक गतिविधियों मे भी प्रतिभागिता जरूरी है। इस आयोजन से सांकृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ ही कई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना कबीलेतारीफ है। स्थानीय शिक्षण संस्थाओं के अलावा पराज संस्था, शतचंडी जनकल्याण समिति, नेत्र प्रशिक्षण संस्थान ने भी अपने कार्यक्रमो से लोक संस्कृति के सुंदर रंग बिखरे। निर्णायक की भूमिका दिनेश रावत और मनोज रावत अंजुल ने निभाई। इस अवसर पर सांस्कृतिक संयोजक पदमेंद्र नेगी, दीपक काला, विपिन गुसाईं, सतेंद्र रावत आदि मौजूद थे। संचालन वीरेंद्र खकरियाल और प्रवीण नेगी ने किया।
