हरिद्वार पुलिस की AHTU टीम ने संवेदनशीलता से जीता आमजन का दिल
हरिद्वार
हरिद्वार जनपद में एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) की सतर्कता और त्वरित कार्यवाही ने एक अनाथ मासूम बालक के जीवन में खुशियों की नई किरण जगा दी है। तीन दिनों से लापता चल रहे 8 वर्षीय कृष्णा को रविवार की शाम कनखल से लावारिस अवस्था में रेस्क्यू किया गया था। सोमवार को पुलिस की मेहनत रंग लाई और उसे उसकी बड़ी बहन दीपिका से मिलवाया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल के दिशा-निर्देशन, नोडल अधिकारी निशा यादव के पर्यवेक्षण और प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह के नेतृत्व में 9 सितंबर 2025 को यह सराहनीय कार्य संभव हो सका।
कृष्णा पुत्र स्व. राकेश धीमन, निवासी ग्राम धारीवाला, तहसील लक्सर, हरिद्वार का चार वर्ष पूर्व माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका था। उसका पालन-पोषण उसकी बड़ी बहन दीपिका और जीजा सोनू द्वारा किया जा रहा था। बीते दिनों अचानक घर से निकल जाने के बाद परिजन उसकी तलाश में परेशान थे।
कनखल से बरामद होने के समय कृष्णा ने केवल “टाटानगर” का जिक्र किया था, जिसके चलते पुलिस ने हरिद्वार जनपद ही नहीं बल्कि बाहरी राज्यों तक परिजनों की तलाश के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया। मीडिया माध्यमों के जरिए प्रसारित खबर से कृष्णा की बहन दीपिका तक सूचना पहुँची और उसने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
कृष्णा को उसकी बहन दीपिका के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बाल कल्याण समिति हरिद्वार के अध्यक्ष के आदेशानुसार विधिक कार्यवाही और काउंसलिंग के बाद बालक को खुला आश्रयगृह कनखल से मुक्त करवा कर उसकी बहन दीपिका के सुपुर्द कर दिया गया।
दीपिका की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मानवीय पहल करते हुए कृष्णा को छात्रावास विद्यालय में दाखिला दिलवाने की जिम्मेदारी भी उठाई। यह कदम एएचटीयू हरिद्वार पुलिस की संवेदनशीलता और सहयोगभाव को दर्शाता है।

इसी तलाश अभियान के दौरान हरिद्वार अपर रोड से तीन और नाबालिग बच्चों को दयनीय स्थिति में रेस्क्यू किया गया। उनकी पहचान सागर पुत्र राजू, उम्र 16 वर्ष, निवासी गोकुलपुरा, दिल्ली, —अरमान पुत्र जाहिद अली चौधरी, उम्र 12 वर्ष, निवासी पूराबिलियन, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.), —प्रकाश पुत्र स्व. सुरेश, उम्र 12 वर्ष, निवासी सुभाष कॉलोनी, रुद्रपुर (उत्तराखंड)
तीनो सभी बालकों का चिकित्सकीय परीक्षण करवाकर उन्हें बाल कल्याण समिति हरिद्वार के आदेशानुसार खुला आश्रयगृह कनखल में सुरक्षित संरक्षण में भेजा गया। पुलिस टीम अब उनके परिजनों से संपर्क की कार्यवाही कर रही है।
इस मानवीय और संवेदनशील अभियान में एएचटीयू टीम के उप निरीक्षक देवेंद्र कुमार, हेड कॉन्स्टेबल राकेश कुमार, विनीता सेमवाल, कॉन्स्टेबल जयराज सिंह, दीपक चंद, महिला कॉन्स्टेबल शशिबाला और गीता की भूमिका उल्लेखनीय रही।
हरिद्वार पुलिस की इस तत्परता ने न सिर्फ एक मासूम को परिवार से मिलवाया बल्कि कई अन्य लावारिस बच्चों को भी सुरक्षित आश्रय दिलाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई।
