ट्रेन की चपेट में आने से वृद्ध की मौत
जौनपुर।
जफराबाद-सुल्तानपुर रेलखंड पर श्रीकृष्णनगर रेलवे स्टेशन बदलापुर के पूर्व तरफ नेवादा मुखलिसपुर गांव में बुधवार की सुबह रेल पटरी पर ट्रेन की चपेट में आने से वृद्ध की मौत हो गई। जेब में मिले आधार कार्ड व आयुष्मान गोल्डेन कार्ड वृद्ध की पहचान कामता निषाद निवासी बौरई थाना सुजानगंज के रूप में हुई। पुलिस की सूचना पर थाने पहुंचे परिजनो ने शिनाख्त कर ली। परिवार वालो के अनुसार कई वर्षों से कामता प्रसाद की मानसिक स्थिति खराब चल रही थी। मंगलवार की रात भोजन करने के बाद वह बिना कुछ बताए घर से निकल गए थे। रात भर स्वजन तलाश करते रहे, लेकिन सुराग नहीं मिला। सुबह मौत की सूचना मिली। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
स्ंतान के दीर्घायु के लिए रखा जीवित पुत्रिका व्रत
जौनपुर। संतान की दीर्घायु के लिए जीवित पुत्रिका का पर्व जिले में आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने बुधवार को पूरे दिन व्रत रखकर सायं सामूहिक रूप से विधि विधान से पूजन किया। महिलायें गाजे बाजे के साथ पूजन करने के लिए उत्साह साथ जाते हुए देखी गयी। ज्ञात हो कि सनातन धर्म में जीवित पुत्रिका का अहम स्थान है। यह व्रत महिलाओं ने अपनी संतान के लिए रखा। हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से शुरू हो जाती है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने संतान की लंबी आयु के लिए जीमूतवाहन की पूजा अर्चना करती है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि यदि इस दिन व्रत को माताएं श्रद्धा पूर्वक करें, तो उनके संतान की लंबी आयु होती है। मान्यताओं के अनुसार जितिया की कथा को पढ़ने से जीमूतवाहन प्रसन्न होकर संतान की लंबी आयु कर देते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार गंधर्व राज जीमूतवाहन धर्मात्मा पुरुष थे। वह युवावस्था में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें नाग माता मिली। उन्हें देखकर जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा। नाग माता ने उन्हें बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है। उन्होंने बताया वह वंश की रक्षा करने के लिए गरुड़ से समझौता किया था कि वह प्रतिदिन उसे एक नाग देंगे जिसके बदले में वह हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। नागमाता के पुत्र को गरूड़ के सामने जाना पड़ रहा है। नागमाता की बात सुनकर जीमूतवाहन ने नागमाता को वचन दिया कि वह उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और वह उनके जीवन की रक्षा करेंगे। तभी जीमूतवाहन ने नाग माता के पुत्र की जगह कपड़े में खुद को लपेट कर गुरुड़ के सामने खुद को पेश किया। उसी जगह पर जहां गरुड़ आया करता था। कुछ ही देर में गरुड़ वहां पहुँचा और जीमूतवाहन को अपने पंजे में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ना शुरू कर दिया। गरुड़ को उड़ते समय कुछ अजीब सा महसूस हुआ उसने सोचा इस बार सांप की हमेशा की तरह चिल्लाने और रोने की आवाज क्यों नहीं आ रही है। यह सोचकर गरुड़ तुरंत कपड़े को हटाना शुरू किया। कपड़े हटते ही उसने वहां सांप की जगह जीमूतवाहन को पाया। इस प्रकार नागमाता और उनका परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई।
स्ंतान के दीर्घायु के लिए रखा जीवित पुत्रिका व्रत
जौनपुर। संतान की दीर्घायु के लिए जीवित पुत्रिका का पर्व जिले में आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने बुधवार को पूरे दिन व्रत रखकर सायं सामूहिक रूप से विधि विधान से पूजन किया। महिलायें गाजे बाजे के साथ पूजन करने के लिए उत्साह साथ जाते हुए देखी गयी। ज्ञात हो कि सनातन धर्म में जीवित पुत्रिका का अहम स्थान है। यह व्रत महिलाओं ने अपनी संतान के लिए रखा। हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से शुरू हो जाती है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने संतान की लंबी आयु के लिए जीमूतवाहन की पूजा अर्चना करती है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि यदि इस दिन व्रत को माताएं श्रद्धा पूर्वक करें, तो उनके संतान की लंबी आयु होती है। मान्यताओं के अनुसार जितिया की कथा को पढ़ने से जीमूतवाहन प्रसन्न होकर संतान की लंबी आयु कर देते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार गंधर्व राज जीमूतवाहन धर्मात्मा पुरुष थे। वह युवावस्था में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें नाग माता मिली। उन्हें देखकर जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा। नाग माता ने उन्हें बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है। उन्होंने बताया वह वंश की रक्षा करने के लिए गरुड़ से समझौता किया था कि वह प्रतिदिन उसे एक नाग देंगे जिसके बदले में वह हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। नागमाता के पुत्र को गरूड़ के सामने जाना पड़ रहा है। नागमाता की बात सुनकर जीमूतवाहन ने नागमाता को वचन दिया कि वह उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और वह उनके जीवन की रक्षा करेंगे। तभी जीमूतवाहन ने नाग माता के पुत्र की जगह कपड़े में खुद को लपेट कर गुरुड़ के सामने खुद को पेश किया। उसी जगह पर जहां गरुड़ आया करता था। कुछ ही देर में गरुड़ वहां पहुँचा और जीमूतवाहन को अपने पंजे में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ना शुरू कर दिया। गरुड़ को उड़ते समय कुछ अजीब सा महसूस हुआ उसने सोचा इस बार सांप की हमेशा की तरह चिल्लाने और रोने की आवाज क्यों नहीं आ रही है। यह सोचकर गरुड़ तुरंत कपड़े को हटाना शुरू किया। कपड़े हटते ही उसने वहां सांप की जगह जीमूतवाहन को पाया। इस प्रकार नागमाता और उनका परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई।
