किशन महिपाल के गीतों के साथ जनजाति महोत्सव का हुआ समापन
देहरादून।
कौलागढ़ के बीआर आंबेडकर स्टेडियम में जनजाति महोत्सव का लोक गायक किशन महिपाल के गीतों के साथ समापन हो गया। किशन के गीतों में जनजातीय भोटिया गीतों के साथ गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति शानदार रही।
देर शाम को किशन महिपाल ने अपने आर्केस्ट्रा टीम के साथ कार्यक्रम शुरू किया। स्याली बम्पाली, त्वै मिलण अयूं छूं में नीति गमाशाली…, किंगरी का छाला घुघुति.., फ्यौलड़िया त्वै देखिक ओंदू यूं मन मां…, रानीखेता रामढोला… समेत भोटिया, रोंग्पा जनजातीय गीतों की सुमधुर प्रस्तुति पर दर्शक खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। इसके अलावा झारखंड, उत्तराखंड, उड़ीसा के कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। वहीं जनजातीय महोत्सव में तीसरे दिन भी दिन में देश भर के अनेक राज्यों से आए जनजतीय कलाकारों व हस्तशिल्पियों ने प्रदर्शनी लगाकर जनजातीय हस्तशिल्प कला का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी स्थल पर 15 राज्यों के पचास स्टॉलों पर हस्तशिल्प से जुड़े कलाकारों ने अपनी कला की ओर दर्शकों का ध्यान आकृष्ट किया। अनुसूचित जाति आयोग अध्यक्ष मुकेश कुमार, जनजाति आयोग अध्यक्ष मूरत राम शर्मा आदि ने कलाकारों का सम्मान किया।
