विद्यालय में पंजीकृत छात्रों को यूनीफार्म, बस्ता उपलब्ध कराना टेढी खीर

उन्नाव।

परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत  छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म, बस्ता, जूता, मोजा उपलब्ध कराना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो गया है। डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजी गई, लेकिन इसका ब्योरा कोई नहीं दे पा रहा है। इसे लेकर शिक्षक परेशान हैं। अभिभावकों के जनधन के खाते भी संदेह के घेरे में बताए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग अभिभावकों के खातों में धनराशि ट्रांसफर करने का दावा कर रहा है, लेकिन कितनों के खाते में पैसा पहुंचा या नहीं इसका सही आंकड़ा किसी के पास नहीं है। बताते चलें शिक्षा सत्र 2021-22 में इस बार कोरोना महामारी के चलते प्राइवेट शिक्षण संस्थान बन्द रहने के कारण परिषदीय स्कूलों में बंपर नामांकन हुए हैं। छात्र-छात्राओं का पंजीकरण प्रेरणा पोर्टल पर किया गया था। शासन के निर्देश पर इस बार बच्चों को जूते, मोजे, दो जोड़ी यूनिफॉर्म एक बैग, एक स्वेटर उपलब्ध कराया जाना है। एक छात्र को इसके लिए 1100 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जानी थी। यह धनराशि अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन शिक्षा विभाग की मानें तो दो सप्ताह पूर्व अभिभावकों के खातों में धनराशि भेज दी गई है। अब शिक्षा विभाग अभिभावकों के खातों में भेजी गई धनराशि से यूनिफॉर्म जूते, मोजे, बैग आदि सामग्री का क्रय कराने का दबाव बना रहे। शिक्षक स्कूलों में अभिभावकों को बुलाकर पूछ रहे हैं कि उनके खातों में धनराशि आई है, तो बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध करा दें। परंतु अभिभावक स्कूलों के शिक्षकों को खातों में आई धनराशि के बारे में जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कहीं स्कूली बच्चे यूनिफॉर्म से वंचित रह न रह जाएं, इसका भी शिक्षकों को डर सताने लगा है। शिक्षकों द्वारा अभिभावकों से जल्द से जल्द बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूली बैग, जूते, मोजे आदि सामग्री उपलब्ध कराने को कहा जा रहा है परंतु अभिभावक उसे अपनी नयी निधि समझ रहे हैं। वहीं  अभी तक कहीं कहीं शिक्षकों को यह भी जानकारी नहीं है कि कितने बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि आई है और कितने बच्चों के खातों में धनराशि नहीं आई है।

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