स्वामी श्रद्धानंद को भारत सरकार भारत रत्न से सम्मानित करें: आर्य समाज
हरिद्वार
स्वामी श्रद्धानंद के 97वें बलिदान दिवस पर गुरकुल कांगड़ी विद्यालय परिवार द्वारा सिंहद्वार पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी आदित्यवेश ने केंद्र सरकार से मांग की कि स्वामी श्रद्धानंद को भारत रत्न सम्मान देना चाहिए। उन्होंने जहां आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वहीं गुरुकुल कांगड़ी कि स्थापना करके लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को चुनौती दी। बलिदान दिवस के मौके पर गुरुकुल से सिंहद्वार तक शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें आर्य समाज से जुड़े लोग शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि 1919 के जालियावाला बाग हत्याकांड के बाद दोबारा आंदोलन प्रारम्भ करने में स्वामी श्रद्धानंद की अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने हिंदी भाषा, संस्कृति, सभ्यता, वेद, राष्ट्रवाद आदि के उत्थान के के लिए कार्य किया। इस अवसर पर सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा नई दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कार्यक्रम में उपस्थित लोक सभा सांसद सत्यपाल सिंह से भी आग्रह किया कि वो इस प्रस्ताव को देश की संसद में उठाएं। पूर्व मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि गुरुकुल परम्परा को पुनः प्रारम्भ करने का स्वामी श्रद्धानंद को जाता है। उन्होंने गुरुकुलों के माध्यम से आजादी के आंदोलन के लिए क्रांतिकारियों को तैयार करने का कार्य किया। चरित्रवान युवाओं का निर्माण गुरुकुलों से ही संभव है। स्वामी आर्यवेश ने कहा कि देश कि आजादी के आंदोलन में आर्य समाज की सबसे बड़ी भूमिका रही है। श्याम जी कृष्ण वर्मा, लाला लाजपत राय, चाचा अजित सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल आदि सभी क्रांतिकारियों की प्रेरणा स्वामी दयानन्द रहे हैं। इस अवसर पर सत्यपाल सिंह, दीनानाथ शर्मा, बिजेंद्र शास्त्री, योगेश शास्त्री, जितेंद्र वर्मा, धर्मेन्द्र शास्त्री सहित विद्यालय परिवार से सभी शिक्षक, कांगड़ी फार्मेसी के कर्मचारी तथा विद्यालय के ब्रह्मचारी उपस्थित रहे।
